अध्याय 37

सेठ की आवाज़ कमरे को बर्फ़ की तरह चीरती हुई निकल गई—हर किसी के कानों में गूँजती, और रीढ़ में सिहरन उतारती।

जेनिफ़र का चेहरा पल भर में सफ़ेद पड़ गया। उसने चादर को कसकर पकड़ लिया; उँगलियों की गाँठें पीली पड़ने लगीं और जैसे इशारे पर, आँखों में आँसू भर आए। “सेठ, मुझे बस तुम्हें खो देने का बहुत डर है।”

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